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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आज कहा कि देश की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय सैन्य रणनीति और एक सुरक्षा ढांचा को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा. रक्षा संबंधी मुद्दों पर चिंतन करने वाले समूह को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने अफसोस व्यक्त किया कि रक्षा क्षेत्र पर होने वाले खर्च को देश के कई लोगों द्वारा बोझ माना जाता है.

चीन का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक क्षमता का एहसास तभी होगा जब सेना के पास आर्थिक विकास और शक्ति दोनों चीजें हों. उन्होंने कहा कि भारत को पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं के पड़ोसी देशों (चीन और पाकिस्तान) से निपटने के लिए नए मित्रों और सहयोगियों से रिश्ता मजबूत करना होगा.

भारत की सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए जनरल रावत ने कह कि देश में राष्ट्रीय सैन्य रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति होनी चाहिए जो कि हमारे पास नही है. हमें अपनी सैन्य रणनीति की पहचान करने में सक्षम होना चाहिए.

दोनों दस्तावेज तैयार हैं और सरकार के पास हैं. उम्मीद है कि दोनों ड्राफ्ट जल्द ही पास हो जाएंगे. ये बातें जनरल रावत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े थिंक टैंक पर ‘स्ट्रैटेजिक ईयर 2017’ का अनावरण करते हुए कहा.

इस संबंध में चीन की अर्थव्यवस्था के विकास विकास का हवाला देते हुए जनरल ने कहा कि मजबूत सेना बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि हम अपनी अर्थव्यवस्था विकसित कर रहे हैं लेकिन सेना को उसकी हिस्सेदारी नहीं मिल रही है.

सेना के ऊपर खर्च होने वाले पैसे को जो लोग बोझ समझते हैं या अर्थव्यवस्था को लगने वाला घाटा समझते हैं मुझे लगता है लोगों को चीन से सबक सीखना चाहिए. उन्होंने कहा कि सेना का और आर्थिक विकास दोनों देश के लिए बहुत जरूरी हैं.

2017-18 के लिए भारत का रक्षा बजट 2.74 लाख करोड़ था, जो कि जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 1.63 प्रतिशत है. चीन का रक्षा बजट अपने जीडीपी के तीन प्रतिशत के करीब है. सुरक्षा विशेषज्ञों और रक्षा प्रतिष्ठानों में एक भावना रही है कि सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण बहुत धीमी गति से हो रहा है और सरकार पिछले कुछ वर्षों में इसके लिए पर्याप्त धन आवंटित नहीं कर रही है.

इस क्षेत्र में विकसित सुरक्षा स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि सुरक्षा मैट्रिक्स पर विचार करते हुए भारत ईरान, इराक और अफगानिस्तान जैसे देशों के साथ घनिष्ठ संबंधों का होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह की नीति विभाजन भारत को मजबूत करेगी.

सेना प्रमुख ने कहा कि ऐसी रणनीति भारत के पश्चिमी पड़ोसी, पाकिस्तान के लिए दो तरफा दुविधा पैदा करेगी, लेकिन भारत के उत्तरी पड़ोसी, चीन से निपटने में भी मदद करेगी. सेना प्रमुख ने कहा कि समय आ गया है कि देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए.

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