आधार कार्ड

नई दिल्ली. राइट टू प्राइवेसी बुनियादी हक है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने गुरुवार को एक राय में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि राइट टू प्राइवेसी कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 21 के तहत आता है। आर्टिकल 21 राइट टू लाइफ एंड पर्सनल लिबर्टी से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर आधार स्कीम पर पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आधार को जरूरी करने के खिलाफ पिटीशंस दायर होने के बाद ही राइट टू प्राइवेसी का मामला 9 जजों की इस बेंच तक पहुंचा था। बेंच ने अपने फैसले में आधार के बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं कहा लेकिन लॉ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार अब आसानी से आधार का दायरा नहीं बढ़ा सकेगी

सुप्रीम कोर्ट को क्या तय करना था?
– 9 जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच को ये फैसला करना था कि राइट टू प्राइवेसी को मौलिक अधिकारों के तहत रखा जा सकता है या नहीं।
बेंच ने क्या फैसला सुनाया?
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राइट टू प्राइवेसी बुनियादी हक है। यह फैसला सुनाने वाली 9 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस जेएस खेहर कर रहे थे। बेंच में जस्टिस जे चेलेमेश्वर, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आरके आग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस अभय मनोहर सप्रे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय कृष्ण कौल और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे।
– इनमें चीफ जस्टिस, जस्टिस नरीमन और जस्टिस नजीर हाल ही में तीन तलाक पर फैसला सुनाने वाली बेंच में भी शामिल थे।
प्राइवेसी का मुद्दा क्यों उठा?
– राइट टू प्राइवेसी का मुद्दा तब उठा, जब सोशल वेलफेयर स्कीम्स का फायदा उठाने के लिए आधार को केंद्र ने जरूरी कर दिया और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशंस दायर की गईं। इन पिटीशंस में आधार स्कीम की कॉन्स्टिट्यूशनल वैलिडिटी को यह कहकर चैलेंज किया गया कि ये प्राइवेसी के बुनियादी हक के खिलाफ है।
– इसके बाद 3 जजों की बेंच ने 7 जुलाई को कहा कि आधार से जुड़े सभी मुद्दों का फैसला बड़ी बेंच करेगी और चीफ जस्टिस कॉन्स्टिट्यूशन बेंच के गठन का फैसला लेंगे। तब चीफ जस्टिस जेएस खेहर के पास मामला पहुंचा। उन्होंने 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच का गठन किया। इस बेंच ने 18 जुलाई को 9 जजों की बेंच के गठन का फैसला लिया।
सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से क्या आधार पर असर पड़ेगा?
– लॉ एक्सपर्ट्स यही कह रहे हैं। अभी केंद्र के 19 मंत्रालयों की 92 स्कीम्स में आधार का इस्तेमाल हो रहा है। एलपीजी सब्सिडी, फूड सब्सिडी और मनरेगा के तहत मिलने वाले फायदे आधार के जरिए मिल रहे हैं। देशभर में करीब 67 करोड़ बैंक अकाउंट आधार से लिंक हैं।
– सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वकील आरके कपूर ने इस जजमेंट के बारे में मीडिया को बताया कि इस फैसले का आधार जैसी स्कीम्स पर असर पड़ सकता है।
– फैसले के वक्त सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे वकील प्रशांत भूषण ने भी कहा- नौ जजों की बेंच ने कहा है कि राइट टू प्राइवेसी मौलिक अधिकार है। अभी तक का आधार एक्ट को सोशल वेलफेयर स्कीम्स और इनकम टैक्स रिटर्न के लिए जरूरी किया गया है। हो सकता है कि अब इसका दायरा नहीं बढ़ाया जाए। अगर सरकार कल कहे कि आप कुछ खरीदें या ट्रेन से ट्रेवल करें तो उसके लिए भी आधार देना होगा तो इसे राइट टू प्राइवेसी के मौलिक अधिकार का हनन माना जाएगा।
http://rozwala.online/wp-content/uploads/2017/08/jjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjj.jpghttp://rozwala.online/wp-content/uploads/2017/08/jjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjj-150x150.jpgnation_firstspecialटॉप 10नई दिल्ली. राइट टू प्राइवेसी बुनियादी हक है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने गुरुवार को एक राय में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि राइट टू प्राइवेसी कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 21 के तहत आता है। आर्टिकल 21 राइट टू लाइफ एंड पर्सनल लिबर्टी से जुड़ा है।...ROJWALA
loading...